बिजनौर जिलाधिकारी महोदय की यह कोठी ब्रिटिश काल की है यह कोठी कब बनी होगी इस बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई लेकिन सन 1857 के स्वतँत्रता सँग्राम के समय कलेक्टर अलेक्जेंडर शेक्सपियर ने रूहेला सरदार नवाब नजीबुद्दौला के पोते नवाब महमूद अली खाँ को जिला बिजनोर की कमान इस शर्त पर सौंपी थी कि वह ब्रिटिश अधिकारियों को सकुशल बिजनौर से बाहर पहुचाएँगे कुछ ही महीनो तक नवाब महमूद अली खाँ ने इस कोठी से जनपद का प्रशासन संभाला था,
आजादी के पहले से ही कलेक्टर यहां रहते आए है। यह कोठी भव्य कैंपस मे स्थित है। लगभग 20 हेक्टेयर में बनी यह कोठी पुराने राजा महाराजों की याद ताजा कराती रहती है।
गंगा नदी के तट पर बसा है बिजनौर प्रत्येक बिजनौरी को इस शहर से संबंध होने पर फख्र होता है।बिजनौरी मतलब खुद्दार और यारबाश। बिजनौर का मूल नाम ‘विजयनगर’ था।
महाभारतकालीन एवं मुगलकालीन कई ऐतिहासिक प्रसिद्ध स्थल एवं जल स्रोत है। जिले में गंगा एवं बारहमासी बहने वाली नदियां हैं। इसके अतिरिक्त पीली नदी मालिन नदी गागन नदी बान नदी छोइयां नदी जैसी मौसमी नदियां हैं।
कुछ ज्यादा खर्चीला नहीं है बिजनौर यहां फाइव स्टार कल्चर अभी नहीं आया है इसलिए सस्ते होटल मिल जाएंगे और 25 रुपये की दर से एक जून का भोजन मिल जाएगा। सुबह नाश्ते में आप सफेद मक्खन लगी ब्रेड गुप्ता कि जलेबी और गुड मठ्ठा पीजिए। शाम को पूजा होटल पर टिक्की समोसा व चाय का आनंद लीजिए।
प्रस्तुति———-तैय्यब अली
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