दिल्ली से लगभग 200 किमी दूर हरियाणा के नूह जिले के जयसिंहपुर गाँव में एक जर्जर दरवाज़े के साथ एक आधा पुता हुआ घर है। जिसमे बच्चे एक गंदे से आंगन में खेल रहे हैं और सैकड़ों मक्खियाँ उनके आसपास मंडरा रही हैं। आँगन में एक जोड़ी मुर्गियाँ घूम रही है । एक गर्भवती औरत गुंघट किये अपना चेहरा ढके हुए बर्तन धो रही है ।
एक कुँवारी लड़की जिसकी शादी होने वाली घर ले एक कोने में बैठी है शायद मुस्कुराने की कोशिश कर रही है और अपनी पांच साल की भतीजी के लिए एक पोशाक सिल रही है। उसकी विधवा माँ उसके बगल में बैठी है।उसे सिलाई पसंद है और वह चाहती है कि उसकी शादी के उपहार के रूप में एक सिलाई मशीन हो।
पेहलू खान की विधवा जेबुना कहती हैं, ” अगर मैं उसके पिता को जिंदा रखती, तो वह जिंदा होती, तो उसकी इच्छा पूरी करने की पूरी कोशिश करती। ” राजस्थान के अलवर में 2017 में गौ तस्करी के संदेह में भीड़ द्वारा खान को लूटा गया था।
19 साल की हनीजा की शादी होनी है। पहलू खान के कत्ल के बाद घर में पहली शादी है। वह आठ बच्चों में उनकी सबसे छोटी बेटी है। हनीजा कहती है अब्बा मुझे हन्नी कहते थे। मुझे उसकी बहुत याद आती है। हम एक साथ बहुत बाते करते थे। जब भी मुझे कोई परेशानी हुई, मैंने उन्हें हमेशा बताया । अगर वह आज हमारे साथ होते, तो मेरी शादी का दिन कुछ अलग ही होता। ज़िन्दगी गुज़ारने के लिए मजबूर, मेरे घरवालो ने शादी के खर्चों को पूरा करने के लिए अपनी भैंस तक बेच दी। उन्होंने करीब 1.5 लाख रुपये का कर्ज लिया है।
पहलू खान की बीवी ज़ेबुना बताती है वह भैंस मेरे पति ने खरीदी थी। बद किस्मती से हमें इसे बेचना पड़ा। भले ही मेरे सभी बेटे अपना काम कर रहे हों, लेकिन बाप की कमी और उसके किये गए काम कोई और नही कर सकता । ज़िन्दगी अब एक बोझ की तरह लगने लगी है
खान की मौत का हादसा ने परिवार पर मानसिक और उनकी माली हालत पर बड़ा और बुरा असर डाला है । उस हादसे के बाद इस शादी ने उनके चेहरों पर मुस्कान लाई है। हनीजा के अलावा कोई भी नए कपड़े नहीं पहनेगा। न तो उनके पास कपड़े खरीदने के लिए पैसे हैं और न ही परिस्थितियाँ उन्हें जश्न मनाने की अनुमति देती हैं। बेटी की शादी है, सब उसके लिए खुश हैं, लेकिन उनका दुख खुशी से भारी है।
जेबुना ने बताती कि खान की मौत के बाद न तो रिश्तेदार और न ही सरकार उनकी मदद के लिए आई। उनके बेटों को डर के मारे अपने पारिवारिक पशुओं के व्यवसाय को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।
पहलू खान के बड़े बेटे इरशाद कहते है “मेरे पिता मवेशी कारोबार में थे लेकिन हम उनके कारोबार को जारी नहीं रख सकते क्योंकि चीजें बदल गई हैं। मेरे पिता का कत्ल बेगुनाह होने के बावजूद क्या गया हम अपने आने वाले वक्त में कुछ इसी तरह का सामना कर सकते हैं, यही वजह है कि हमने मवेशी कारोबार को जारी नहीं रखने का फैसला किया ।”
पहलू खान का मामला तब सुर्खियों में आया जब एक अप्रैल, 2017 को एक गौ रक्षक समूह ने जयपुर को अलवर से जोड़ने वाले एक राजमार्ग पर उस पर बेरहमी से हमला किया गया। उसे घातक चोटें आईं और 3 अप्रैल को अलवर के एक अस्पताल में उसकी मौत हो गई। उसकी हत्या को कैमरे में कैद कर लिया गया। हालांकि, अलवर की एक अदालत ने सभी छह आरोपियों को बरी कर दिया। मामले में दो नाबालिगों को बाल सुधार गृह में तीन साल के लिए भेजा गया था।
पहलू खान की बीवी जेबुना को अदालत पर पूरा भरोसा है और अशोक गहलोत सरकार से इंसाफ की उम्मीद है। वो कहती है “जिन्होंने मेरे पति को मार डाला, वे आज़ाद हैं। वे बाहर हैं, एक आज़ादी की ज़िन्दगी जी रहे हैं और हमने सब कुछ खो दिया है। मैं राजस्थान सरकार से अपील करती हूं कि वह हमें इंसाफ दे और उचित मुआवजा दे। ‘
लेकिन खान की बेटी हनिज़ा का एक अलग नज़रिया है और वह कहती है कि उसे अदालत में कोई उम्मीद नहीं है। ना किसी सरकार से इंसाफ की उम्मीद है। जब उन्होंने पिछले तीन साल में कुछ नहीं किया, तो अब वे क्या करेंगे?”
बिजनौर एक्सप्रेस से आसिम जलालाबादी की रिपोर्ट
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