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बिजनौर सपा जिलाध्यक्ष राशिद की कार्यकारिणी को लेकर मुखर हुए सपाई

▪️कई पूर्व सपाई पदाधिकारियों का आरोप लालच और सिफारिश में बांटे पद

बिजनौर। समाजवादी पार्टी जनपद बिजनौर की नवगठित कार्यकारिणी को लेकर सपाइयों में ही रार छिड़ गई है। पार्टी के पुराने और कर्मठ नेताओं व कार्यकर्ताओं का कहना है कि कार्यकारिणी में निष्ठावान व पार्टी के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं की अनदेखी की गई है,

और निष्क्रिय नेताओं को रेवड़ियों की तरफ पद बांटे गए कार्यकारिणी का गठन एक नेता के ड्राइंगरूम में बैठकर लालच और सिफारिश के दम पर किया गया है। जिससे जिले के तमाम वरिष्ठ नेता और विपक्ष में रहकर पार्टी को जिताने वाले तमाम नेता खुश नहीं है। साथ ही उन्होंने आशंका जताई है कि संगठन निष्क्रिय और स्वार्थ नेताओं के हाथों में चला गया है। जिसका खामियाजा पार्टी को 2022 के चुनाव में उठाना पड़ सकता है।

गत बुधवार को समाजवादी पार्टी कार्यालय पर जिलाध्यक्ष राशिद हुसैन ने पार्टी की नई कार्यकारिणी की घोषणा की थी। कार्यकारिणी में 6 उपाध्यक्ष, 24 सचिव, एक महासचिव, एक कोषाध्यक्ष, 22 सदस्य और निजी सचिव सहित प्रवक्ता आदि को नियुक्त किया गया था। जब से कार्यकारिणी की घोषणा की गई है तभी से जनपद में सपाई विरोध में मुखर होते जा रहें है।

पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं का कहना है कि कार्यकरिणी का गठन लालच और निजी स्वार्थ के लिए चन्द नेताओं की सिफारिश पर किया गया है। और सिफरिश करने वाले वो नेता है जो पार्टी को अपनी मिल्कियत समझते है। पार्टी हाई कमान को गुमराह कर ऐसे नेता के हाथों में संगठन की कमान सौपते है जो अपने कस्बे के चुनाव में भी तीसरे या चौथे नम्बर पर आते है। 2012 से 2017 तक सत्ता की मलाई चाटने और अपने निजी स्वार्थ के लिए जेल जाने वाले नेताओं को तरजीह दी जाती है। जबकि विपक्ष में रहकर सत्ता और प्रशासन का डटकर सामना करने वाले नेताओं को जिले के चंद नेता अनदेखा करते है।

क्योंकि वो नेता उनके निजी स्वार्थ को पूरा नहीं कर पाते। बीजेपी का झंडा उठाने वाले नेताओं को पार्टी में पद दिया गया, जिसका खमियाजा पार्टी को उठाना पड़ेगा। कार्यकारिणी के विरोध में तेजी से मुखर हो रहें तमाम सपाइयों का यह भी कहना है कि जब सत्ता थी तो नेता थाने से किसी बेगुनाह को छुड़ा लाते थे, लेकिन यह कोई कमाल नहीं था। क्योंकि इसके लिए उस नेता की ताकत नहीं बल्कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ताकत थी। ताकत तो उस नेता की है जो विपक्ष में रहकर थाने से यह काम करें, लेकिन ऐसा काम करने वाले तमाम सपाइयों को ड्रेसिंग रूम की राजनीति करने वाले नेता अनदेखा कर पार्टी हाई कमान को गुमराह करते है।

वर्तमान समय के हालात को देखते हुए 2022 में सरकार बनाने के लिए ऐसे नेता की जरूरत है जो धर्मनिरपेक्ष हो, जायज़ काम पर शासन-प्रशासन से लौहा लेने वाला हो और तमाम मुश्किलों के बाद भी पार्टी का झंडा गर्व से लहरा रहा हो। ऐसे नेता नहीं जो विपक्ष में रहने का हवाला देकर बिल में छुपे हुए हो और अपनी सिफारिश के लिए भी निडर नेता की तलाश करते हो। चापलूसी में वो भी मस्त है जिनकी राशन कोटे की दुकान और मुकदमे से बचाने में भी निडर नेता ही आगे आते है। जनपद के सपाइयों ने यह भी ऐलान किया है कि जल्दी ही पार्टी हाई कमान से मिलकर जनपद में पार्टी को नुकसान और अपने स्वार्थ के लिए काम करने वाले नेताओं की शिकायत से अवगत कराया जाएगा।

” समाजवादी पार्टी का हर छोटा-बड़ा कार्यकर्ता संगठन व पार्टी के लिए अहम है। यदि नवगठित कार्यकारिणी को लेकर किसी को सहमति या असहमति है तो यह उसका अधिकार है। नवागत जिलाध्यक्ष को इस मामले में तूल नहीं देना चाहिए। सोशल मीडिया पर किसी सम्मानित नेता के बारे में अपशब्द कहना सही नहीं है। यदि कोई नेता जनता के सुख-दुख में शामिल होकर उनकी आवाज़ बन रहा है या थाने-चौकी जाकर जनता के लिए लड़ रहा है तो ऐसा करके वो नेता पार्टी की नीतियों को आगे बढ़ा रहा है। विपक्ष में रहकर जुल्म-ज्यादती सहकर जनता के काम आने वाला ही असली नेता होता है। यहीं समाजवादियों की असली पहचान है। ऐसे नेता का आदर करना चाहिए अनादर नहीं।

अनिल यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष सपा

“पता नहीं पार्टी जिलाध्यक्ष के सामने ऐसी कौन सी मजबूरी रहीं होगी, जिसके दबाव में बढ़ापुर नगर अध्यक्ष ऐसे व्यक्ति को बनाया गया जो पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण 6 साल से निष्काषित चल रहा था। कार्यकारिणी में निष्ठावान कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया गया है। और यह सब लालच और सिफारिश के कारण किया गया।

हाजी जावेद राईन, पूर्व जिलाध्यक्ष अल्पसंख्यक सभा, सपा

” निकाय चुनाव में पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ उम्मीदवार को चुनाव लड़ाने वाले जिस नेता को पार्टी ने 6 साल के लिए निष्काषित किया था। उसी नेता को नए जिलाध्यक्ष ने नगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी। जबकि पार्टी के लिए समर्पित नेता को दरकिनार किया गया।

हसीब अहमद, पूर्व नगर अध्यक्ष अफजलगढ़

“2004 से पार्टी जॉइन करने के बाद हमेशा पार्टी के लिए काम किया। हर चुनाव में पार्टी उम्मीदवार का चुनाव लड़ाया। कभी पार्टी में पद या अन्य स्वार्थ का लालच नहीं रखा, लेकिन नवगठित कार्यकारिणी में निष्ठावान कार्यकर्ताओं का अपमान किया गया है।

राजीव सूद, वरिष्ठ सपा नेता

” पार्टी में कुछ लोग मनमानी कर रहे है। संगठन पर कब्जा किया हुआ है। खुद को बेहतर बनाने की नाकाम कोशिश में पुराने और जनता से सीधे जुड़े नेताओं को जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है।

हाजी फैसल, पूर्व नगर अध्यक्ष

“पिछले दिनों मेरे परिवार में मौत हो गयी थी। शोक की वजह से नए जिलाध्यक्ष की फ्लैक्सी क्षेत्र में नहीं लगा पाया। पार्टी के बड़े नेताओं ने मेरे दुख में शामिल होने के बजाय मुझे निष्क्रिय कार्यकर्ता घोषित कर दिया और वास्तव में निष्क्रिय कार्यकर्ता को पद दिया

रफीक अंसारी, पूर्व अध्यक्ष विधानसभा क्षेत्र नजीबाबाद

” विपक्ष में रहकर पार्टी को मजबूत करने और 2022 के चुनाव से पूर्व जनाधार बढ़ाने वाले नेताओं को संगठन में जगह नहीं दी गयी। जो नेता मजबूर व असहाय लोगों की आवाज़ बनकर उनकी लड़ाई लड़ने का काम कर रहें है। जनता के लिए अत्याचार झेल रहे है। निस्वार्थ भाव से पार्टी को अपने खून से सींच रहें है उन नेताओं को चन्द बड़े नेता नजरअंदाज कर रहें है।

सैफुल्ला मलिक, पूर्व जिला उपाध्यक्ष

” जिन नेताओं ने पार्टी से अलग होकर विपक्षी उम्मीदवार को चुनाव लड़ाया उन्हें सिफारिश और लालच के दम पर नगर अध्यक्ष बनाया गया। जिसका विरोध लखनऊ तक किया जाएगा।

शेख रईस, पूर्व नगर अध्यक्ष, चांदपु

रिपोर्ट बाई बिजनौर एक्सप्रेस

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