जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने जिले में कृषक उत्पादक संगठनों के गठन कार्य में बहुत कम प्रगति पाए जाने तथा स्थानीय किसानों को भारत सरकार द्वारा संचालित उक्त योजना का लाभ न पहुंचाए जाने पर मुख्य विकास अधिकारी को प्रबंधक नाबार्ड एवं क्लस्टर बेस्ड बिजनेस ऑर्गेनाइजेशन के प्रदेश स्तरीय अधिकारी के विरुद्ध चेतावनी जारी करने के निर्देश दिए
वहीं दूसरी ओर उक्त कार्य में कृषि विभाग द्वारा नाबार्ड एवं कार्यदायी संस्था को अपेक्षित सहयोग उपलब्ध न कराए जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए जिला कृषि अधिकारी को निर्देशित किया कि किसानों के हितों के संरक्षण की मुख्य जिम्मेदारी कृषि विभाग की होती है, अतः एफपीओ निर्माण कार्य में कार्यदायी संस्था को पूर्ण सहयोग प्रदान करें और जो एफपीओ गठित हो चुके हैं, उनका प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन करने के लिए अपने दायित्वों को पूरी गंभीरता के साथ पूरा करना सुनिश्चित करें।
जिलाधिकारी उमेश मिश्रा आज दोपहर 12ः30 बजे कलेक्टेªट सभा कक्ष में कृषक उत्पादक संगठनों के गठन एवं प्रोत्साहन से संबंधित जनपद स्तरीय मानीटरिंग कमेटी (डीएमसी) एवं जनपद स्तरीय परियोजना प्रबंधन इकाई (डी0पी0एम0यू0) की आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए निर्देश दे रहे थे।
उन्होंने निर्देश दिए कि कृषक बंधुओं की आय में अपेक्षित वृद्धि करने और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए भारत सरकार द्वारा यह कार्यक्रम शुरू किया गया है। जिसके अंतर्गत गठित प्रत्येक एफपीओ को उसके गठन के वर्ष के अगले 05 वर्षों तक हैण्ड होल्डिंग सपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। भारत सरकार द्वारा निर्धारित कुल लक्ष्य में से 15 प्रतिशत कृषक उत्पादक संगठन का गठन एवं प्रोत्साहन आकांक्षात्मक जिलों में प्रति विकास खण्ड में एक एफपीओ के गठन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में गठित होने वाले एफपीओ के गठन में राज्य सरकार के अधीन विभिन्न विभागों यथा कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता, कृषि विपणन, ग्राम्य विकास, पंचायती राज विभाग के महत्वपूर्ण योगदान के दृष्टिगत कृषि उत्पाद के बाद प्रसंस्करण इत्यादि की विभिन्न योजनाओं के लिए सहायता प्रदान किए जाने का प्रावधान किया गया है।
जिलाधिकारी की अनुमति से कमेटी के सदस्यों को अवगत कराया कि नाबार्ड के उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा सर्व सेवा समिति संस्थान (सीबीबीओ) को 25 मार्च 2021 के पत्र द्वारा बिजनौर जिले में सीएमएस गाइडलाइन के तहत एक एफपीओ बनाने की स्वीकृति प्रदान की गयी थी जो कि 23 जुलाई 2021 को कंपनी एक्ट 2013 के तहत नूरपुर श्री राम किसान उत्पादक प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के नाम से रजिस्टर्ड हो चुका है। वर्तमान में इस एफपीओ के 5 बोर्ड डायरेक्टर व 5 प्रमोटर के साथ कुल 20 सदस्य ही बने हैं।
समीक्षा के दौरान उक्त एफपीओ को प्रशिक्षण उपलब्ध न कराने तथा उचित मार्गदर्शन न करने के कारण निष्क्रिय अवस्था में पाए जाने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को गठित सभी एफपीओ को गुणवत्तापरक प्रशिक्षण, मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीकी जानकारी तथा उत्पादकों के विपणन आदि पर आधारित सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले में ऑर्गनिक खेती की अपार सम्भावनाएं हैं और जिले के किसान भी इसके लिए उत्सुक और गंभीर हैं।
उन्होंने नाबार्ड, कृषि आदि से संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि पूर्ण गंभीरता और निष्ठा के साथ उक्त योजना को मानक के अनुरूप संचालित करना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि उक्त सम्बन्ध में अगले सप्ताह आयोजित होने वाली बैठक में उनके द्वारा निर्गत दिशा-निर्देशों का अनुपालन करना सुनिश्चित किया जाए ताकि अपेक्षित प्रगति प्रदर्शित हो सके।
इस अवसर पर उप कृषि निदेशक ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि जनपद बिजनौर के 11 विकास खंडों में से 07 विकास खंडों में 16 एफपीओ का गठन किया जा चुका है। विकासखंड धामपुर, किरतपुर, कोतवाली, अफजलगढ़ में कोई कृषक उत्पादक संगठन गठित नहीं है। भविष्य में इन चारों विकास खंडों में प्राथमिकता के आधार पर कृषक उत्पादक संगठनों का गठन किया जाए।
जिलाधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया कि जनपद हेतु कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) गठन के लक्ष्य प्राप्त होने पर संबंधित नामित संस्थाओं द्वारा उपरोक्त 4 विकास खंडों में सर्वप्रथम एफपीओ के गठन के पश्चात ही अन्य विकास खण्डों में एफपीओ का गठन सुनिश्चित किया जाएगा।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी के0पी0 सिंह, उप कृषि निदेशक गिरीश चन्द्र, जिला कृषि अधिकारी अवधेश कुमार मिश्र, डीडीएम नाबार्ड ब्रिजेश कुमार, र्स्वसेवी संस्था सीबीबीओ के स्टेट हेड दिनेश कुमार यादव, जिला उद्यान अधिकारी, जिला लीड बैंक अधिकारी सहित प्रतिनिधि कृषक उत्पादक संगठन मौजूद थे।
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